चलें अपराध से अपराध मुक्ती की ओर

भारत में दिनों दिन बढ़ता अपराध समाज के लिये खतरा और चुनौती है


बढ़ता अपराध ना केवल ना केवल समाज के लिये बल्कि पूरे विश्व के लिये खतरा है। आज समाज में हर व्यक्ति खुद को औऱ खुद के परिवार को इस अपराधयुक्त समाज में असुरक्षित और भयभीत मेहसूस कर रहा है। 10 दिसंबर को मानवाधिकार आयोग के सार्वभौम घोषणा पत्र में भी मानवधिकारो की रक्षा के लिये निर्देश दिये गये है। लेकिन जिस समाज में अपराध बढ़ रहा हो उस समाज में मानवो के अधिकार कैसे सुरक्षित होंगे?


समाज में आज युवा  नशा औऱ सेक्स इतना गंभीर शिकार हो गाया है कि अपने जीवन के जीने का उद्देश्य ही भूल गया है। इन्ही प्रवृतियों मे रेहकर खुद को अपराध में लिप्त कर रहा है। जिस देश का युवां अंधकार में खुद फसा हो वों क्या देश को विकास की रोशनी दिखायेगा।


कोई परिवार ये नही चाहता की उसकी बच्ची के साथ रास्ते मे छेड़छाड़, बलात्कार जैसी गंभीर घटना हो और ना ही कोई परिवार अपने बच्चे को किसी अपराध का शिकार देख सकता एसे मे समाज में बढ़ते अपराध को एक गंभीर चुनौती मानते हुए इसके कारण औऱ परिणाम को जानते हुए देश के हर व्यक्ति को इस पर नियंत्रण को अपना स्वधर्म नही मानना चाहीयें।


अपराध बढने के मुख्य कारण


देश मे अपराध बढ़ने का कारण है लोगो का गिरता चरित्र और स्वार्थ की मानसिकता जिसमें व्यक्ति फस कर अपना सब कुछ बर्बाद कर लेता है। शिक्षा व्यवस्था का लचर हाल युवाओं को दिशाहीन बनाता है। इसके अलावा ....


(1) देश की कानून व्यवस्था- किसी भी देश की अव्यवस्थित कानून व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त रखने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। आज जिला प्रशासन स्वयं अपराध में लिप्त हो रहा है। प्रशासन में कई बडे एवं छोटे ऐसे अफसर हैं जो अपराधियों द्वारा घूंस लेते हैं जिस कारण अपराधी नई-नई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं; बाद में पुलिस वाले हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं जिस प्रकार देश अपराधमुक्त होने के स्थान पर अपराधयुक्त होता है। इसे रोकने के लिए कानून व्यवस्था में सख्ती की आवश्यकता है। प्रशासनिक अधिकारियों को ईमानदार होना आवश्यक है। ऐसा होने पर अपराध स्वतः रूकेगा।


(2) अल्प जनचेतना- कानून व्यवस्था के अतिरिक्त अल्प जनचेतना व सजगता देश को भी अपराध मुक्त करने में बाधा उत्पन्न करती है। आज हम अपनी प्रचीन गौरवशाली परम्पराओं से दूर हो रहे है। हम स्वयं को पहचान नहीं पा रहे है। हमारे स्वाभिमान व आत्मविश्वस में निरन्तर कमी आ रही है, हमारे चरित्र में दोहरापन आ गया है जो कि अपराध जैसी असामाजिक घटना को न केवल बढावा दे रहा है, अपितु इस पर नियन्त्रण में अवरोध भी पैदा कर रहा है। इस अवरोध को दूर करना आवश्यक है। जनचेतना जगाने पर अपराध रोके जा सकते है।


(3) राजनीति का अपराधीकरण- वर्तमान समय में राजनीति व अपराध में जबरदस्त सामंजस्य स्थापित हुआ है। अपराधी धीरे-धीरे राजनिति में आ रहे है तथा महत्वपूर्ण पद संभाल रहे है। इस प्रकार आज देश की शासन व्यवस्था आपराधिक लोगों के हाथ में जा रही है।


नेता और अपराधियों में गठबन्धन ने स्थिति को अत्यन्त विकृत और नारकीय बना दिया है। मतदाताओं को चाहिये कि अपराध वृत्ति या अपराधिक इतिहास रखने वाले चुनाव में उतरने वाले लोगों को वोट न देकर उनका बहिष्कार करें क्योकी जब सत्त्ता पर बैठने वाला नेता ही अपराधिक मानसिकता का हो तो समाज को अपराधमुक्त कैसे बनायेगा?


(4) भ्रष्टाचार-वर्तमान समय में देश में भ्रष्टाचार तीव्र गति से बढ रहा है। संसद के सडक तक भ्रष्टाचार के नमूने देखने को मिलते है। जगह-जगह भ्रष्टाचार अपने पांव फैला रहा है। कोर्ट-कचहरी हा या हाकिम की चैखट, सभी जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। सच्चे अर्थो में भ्रष्टाचार अपराध के लिए एक मुख्य कारण बन गया है।


यह भ्रष्टाचार का नतीजा है कि जेल में अपराधियों का सभी प्रकार की सुख-सुविधाए उपलब्ध कराई जाती है। उन्हे जेल में ही अच्छा खने-पीने एवं पहनने की व्यवस्था की जाती है। फोन, मोबाइल तथा हथियारों को भी वे हासिल करके जेल से ही अपने अपराध की बादशाहत चलाते है।


उपसंहार- इस कुप्रवृति से बचाव के लिए सख्त कानून और सजगता की आवश्यकता है। अपराधियों के विरूद्ध अदालतों में शीघ्र निर्णय होना चाहिये ताकि पीडितों को न्याय और अपराधियों को कठोर दण्ड मिल सके। उपरोक्त बिन्दुओं पर ध्यान देने पर अपराध पर नियन्त्रण और अपराधमुक्त समाज की कल्पना साकार हो सकेगी।


अपराध मुक्त निर्माण योजना की 3 महिने की क्रिया विधि



  • समाज के परिवारों को जागरुक करने के लिये “पब्लिक अवेयरनेस वर्कशाप”

  • युवाओं को बढ़ते अपराध की तरफ जानें से रोकने के लिये “ऐडुकेशनल फोरम फार चाईल्ड डवलेपमेंट वर्कशाप “

  • पुलिस प्रशासन औऱ कानून प्रशासन के साथ मिलकर अपराधिक मानसिकता के लोगो के बीच चरित्र निर्माण वार्कशाप

  • मूल्याकंन औऱ सम्मान समारोह


उद्देश्य-



  • समाज में युवाओं में बढ़ते नशा सेक्स और वशीकरण की मानसिक्ता को रोकना

  • बालिकाओं और महिलाओं के प्रति बढते बलात्कार छेड़ छाड़ की घटनाओं पर रोक लगाना

  • जातिवाद आलगाववाद आरजक तत्वों पर नियंत्रण

  • घरेलू हिंसा पर रोक लगाना।

    निर्धारित कार्य क्षेत्र-



  • शिक्षण संस्थान, स्कूल, कालेज, यूनिबर्सीटी

  • कारागार

  • पूलिस प्रशासन

  • सार्वजनिक स्थान